8 वजहें क्यों बच्चे नहीं सुनते पेरेंट्स की बात – जानिए कैसे करें उन्हें समझाने की कोशिश

बहुत से पेरेंट्स अकसर यह शिकायत करते हैं कि उनके बच्चे उनकी बातों को अनसुना कर देते हैं। चाहे कितनी भी बार समझाएं, बच्चे ध्यान नहीं देते। कभी-कभी तो वे जवाब देने लगते हैं या बहस पर उतर आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी खुद से यह सवाल किया है कि बच्चे आखिर हमारी बातें क्यों नहीं सुनते? क्या इसके पीछे सिर्फ बच्चों की गलती है या हमारी परवरिश के तरीके में भी कुछ सुधार की ज़रूरत है?आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बच्चे किन कारणों से पेरेंट्स की बात नहीं सुनते और कैसे हम उन्हें बेहतर तरीके से समझा सकते हैं।

1.समझ की कमी

बच्चों का दिमाग अभी विकास की अवस्था में होता है। कई बार वे पेरेंट्स की बातों को समझ ही नहीं पाते। जब हम बड़े होकर अपने अनुभव के आधार पर कुछ कह रहे होते हैं, तो जरूरी नहीं कि बच्चा उसकी गहराई को समझे। अगर हम बच्चों को उनकी समझ के स्तर पर बात समझाएं, तो वे बेहतर प्रतिक्रिया देंगे।

✅ क्या करें:

उनकी उम्र और समझ के अनुसार शब्दों का चयन करें

उदाहरणों के माध्यम से बात समझाएं

उन्हें सवाल पूछने दें

2.खराब परवरिश और अनुशासन की कमी

अगर घर में शुरुआत से ही अनुशासन और सीमाएं तय नहीं की गईं, तो बच्चे पेरेंट्स की बातों को गंभीरता से नहीं लेते। पेरेंटिंग में अनुशासन के बिना बच्चे अपनी मनमानी करने लगते हैं।

✅ क्या करें:

समय पर सही और गलत का अंतर बताएं

सीमाएं तय करें, लेकिन प्यार के साथ

हर काम की एक दिनचर्या बनाएं

3. पेरेंट्स का बुरा बर्ताव

अगर माता-पिता खुद गुस्से में रहते हैं, बुरे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं या घर में हमेशा तनाव का माहौल होता है, तो बच्चा उस माहौल से चिढ़ने लगता है और पेरेंट्स की बातों को अनदेखा करता है।

✅ क्या करें:

बच्चे के सामने विनम्रता और आदर का व्यवहार दिखाएं

गुस्से की बजाय शांत रहकर बात करें

अपने व्यवहार को बच्चे के सामने सुधारें

4. ऊंची आवाज में बात करना

अगर हर बार आप बच्चे से ऊंची आवाज में बात करते हैं, चिल्लाते हैं, तो बच्चा उस टोन से डरने लगता है या फिर उसे नजरअंदाज करने लगता है।

✅ क्या करें:शांत और संयमित आवाज में बात करेंचिल्लाने की बजाय आंखों में देखकर बात करेंआवाज के बजाय भावनाओं का सहारा लें

5. अधिक स्वतंत्रता की चाह

बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है। वे खुद के फैसले लेना चाहते हैं और उन्हें नियंत्रण में लाना उन्हें अच्छा नहीं लगता।

✅ क्या करें:

बच्चे की राय को महत्व दें

उन्हें छोटे-छोटे फैसले लेने की अनुमति दें

उनकी आज़ादी में संतुलन रखें

6. पेरेंट्स द्वारा इग्नोर किए जाना

अगर माता-पिता अपने बच्चे की भावनाओं, बातों या ज़रूरतों को अनदेखा करते हैं, तो बच्चा भी पेरेंट्स की बातों को अनदेखा करने लगता है। वह सोचता है कि उसकी कोई कदर नहीं हो रही।

✅ क्या करें:

बच्चे से हर दिन कुछ समय बात करें

उसकी बातों को ध्यान से सुनें

उसकी भावनाओं को समझें और स्वीकारें

7. बार-बार धमकी देना या चेतावनी देना

अगर आप हर बार किसी बात पर बच्चे को डांटते हैं या धमकी देते हैं लेकिन कभी अमल नहीं करते, तो बच्चा आपको गंभीरता से लेना बंद कर देता है।

✅ क्या करें:

हर बार डांटने या धमकाने की बजाय संवाद करें

चेतावनी देने से पहले समझाएं

एक बार नियम बना दिया तो उस पर टिके रहें

8. जिद्दी स्वभाव का होना

कुछ बच्चे स्वभाव से ही जिद्दी होते हैं। वे हर बात का विरोध करना चाहते हैं और अपने मन का करना पसंद करते हैं। लेकिन यह भी पेरेंटिंग के तौर-तरीकों से जुड़ा होता है।

✅ क्या करें:

बच्चे की जिद को नजरअंदाज करने की बजाय समझने की कोशिश करें

उसे विकल्प दें, जिससे वह नियंत्रण महसूस करे

उसकी बात को स्वीकार करते हुए सही दिशा दिखाएं

साइकोलॉजिस्ट की सलाह: क्या करें?

  1. खुला संवाद बनाए रखें – बच्चों से बात करते समय उन्हें टोकें नहीं, उन्हें खुलकर बोलने दें।
  2. नियम और प्यार दोनों साथ रखें – अनुशासन सख्ती से नहीं, समझदारी से हो।
  3. बच्चों की भावनाओं का सम्मान करें – उनकी दुनिया को समझें, तब वे आपकी दुनिया को समझेंगे।
  4. रोल मॉडल बनें – जैसा व्यवहार आप चाहते हैं, वही खुद अपनाएं।

बच्चे अगर आपकी बात नहीं सुन रहे हैं, तो उन्हें समझने और संवारने की ज़रूरत है, न कि केवल सुधारने की। एक अच्छी परवरिश का मतलब है कि बच्चा आपको सम्मान दे, लेकिन वह तभी होगा जब आप भी उसकी भावनाओं और ज़रूरतों का आदर करें।

याद रखें, बच्चे सुनते हैं — लेकिन तब, जब उन्हें लगता है कि उनकी भी कोई सुन रहा है।

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